Fiction

देसी वॉर

इस दुनिया में हर चीज़ की अपनी एक तासीर होती है; कुछ ठंडक देती है, कुछ आग लगाती है, और कुछ ऐसी भी होती हैं जो धीरे धीरे ज़हर बनकर नसों में उतर जाती हैं। देसी शराब का यह धंधा भी वैसा ही ज़हर है, जो सिर्फ़ गिलास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेतों, गलियों, थानों, अस्पतालों और विधानसभाओं तक फैल जाता है। हरियाणा और…

Read more about this book
Delivery to your
PIN code
Choose your
preferred format
Easy online
checkout
See all product details ↓

BETWEEN THE COVERS

About this book

इस दुनिया में हर चीज़ की अपनी एक तासीर होती है; कुछ ठंडक देती है, कुछ आग लगाती है, और कुछ ऐसी भी होती हैं जो धीरे धीरे ज़हर बनकर नसों में उतर जाती हैं। देसी शराब का यह धंधा भी वैसा ही ज़हर है, जो सिर्फ़ गिलास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेतों, गलियों, थानों, अस्पतालों और विधानसभाओं तक फैल जाता है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरहद पर चलने वाला यह कारोबार कच्ची भट्ठियों से शुरू होकर बड़े नेताओं की ड्रॉइंग रूम तक जाता है, जहाँ बोतलों की जगह अब फाइलें और फंडिंग के सौदे रखे होते हैं। हर दिन हज़ारों लीटर शराब गाड़ियों, ट्रकों और नावों में छुपकर उस पार से इस पार आती है; कभी बारात की बैंड-बाजे में खोकर, कभी चुनावी रैली के नारों में दबकर, और कभी किसी गाँव के चुपचाप जलते चूल्हे के साथ। ‘देसी वॉर’ ऐसे ही धंधे से उठती हुई कहानी है, लेकिन यह सिर्फ़ तस्करी की दास्तान नहीं है। यह उन औरतों की कहानी है जो मजबूरी और अपमान की मिट्टी से उठकर बंदूक थामती हैं, उन मर्दों की जो बोतलों के सहारे खुद को खुदा समझ बैठते हैं, और उस व्यवस्था की जो सब कुछ देखकर भी चुप रहती है क्योंकि उसकी आँखों पर सत्ता की पट्टी बँधी है। यह उपन्यास किसी एक हीरो या एक खलनायक की तलाश नहीं करता, बल्कि उन लोगों के बीच झांकता है जिनकी ज़िंदगी और जंग के बीच की रेखा बहुत पहले धुंधली हो चुकी है। यहाँ डॉक्टर भी डॉन है, विधवा भी सरहद की सिक्योरिटी है, और जासूस भी कभी–कभी अपने ही दिल से हार जाता है। हर चरित्र अपने तरीके से सही भी है और ग़लत भी, जैसे मिलावटी शराब में स्पिरिट और घातक ज़हर साथ–साथ तैरते रहते हैं। इस कहानी में गोलियाँ चलेंगी, शव मिलेंगे, प्रेस कॉन्फ़्रेंस होंगी, वीडियो लीक होंगे, पर असली लड़ाई कभी बोतलों पर नहीं, ज़मीर पर चलेगी। यह जंग शराब की है, लेकिन इसमें सबसे ज़्यादा जलती है इंसान के अंदर की इंसानियत,और शायद यही आग पाठक के दिल तक भी पहुँचे, यही इस किताब की असली वजह है।

AT A GLANCE

Product details

Item weight
.550 kg
Dimensions
21 × 16 × 2 cm
SKU
BCP0001007
Author
Shivanandan
Categories
Format
Audio Book, E-Book, Hardcover, Paperback

THE VOICE BEHIND THE BOOK

About the author

FROM OUR READERS

Customer reviews

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.