Description
बीतता समय, बनता जीवन — समय को समझने और सार्थक जीवन जीने की यात्रा पल्लव सान्याल की एक विचारप्रधान हिन्दी पुस्तक है, जो समय को केवल घड़ी की सुइयों से नहीं बल्कि जीवन के अनुभवों, निर्णयों, रिश्तों, अवसरों और संभावनाओं से जोड़कर देखती है।
हम अक्सर कहते हैं—“समय नहीं है।” लेकिन क्या वास्तव में हमारे पास समय कम है, या हम अपने उपलब्ध समय का उपयोग उन चीज़ों में कर रहे हैं जो हमारे जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण नहीं हैं?
यह पुस्तक इसी प्रश्न से शुरुआत करती है।
पुस्तक के अध्याय समय की वास्तविकता, समय की बर्बादी, व्यस्तता और सार्थकता, भविष्य की चिंता, वर्तमान की उपेक्षा, धन और महत्वाकांक्षा, अवकाश, स्वास्थ्य, आत्मचिंतन, ज्ञान, दर्शन और जीवन की प्राथमिकताओं जैसे विषयों पर विचार करते हैं।
लेखक पाठक को केवल समय-प्रबंधन के सामान्य नियम देने के बजाय यह सोचने के लिए प्रेरित करते हैं कि हम अपना समय आखिर किस जीवन के निर्माण में लगा रहे हैं।
पुस्तक विद्यार्थियों, professionals, परिवार और जिम्मेदारियों में व्यस्त लोगों तथा उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है जो अपने समय, प्राथमिकताओं और जीवन की दिशा पर दोबारा विचार करना चाहते हैं।
समय को बचाना ही पर्याप्त नहीं है—उसे सही अर्थ में जीना भी आवश्यक है।












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